९ आश्विन २०७८, शनिबार September 25, 2021

मोर सुन्दर झोपरी

२५ श्रावण २०७८, सोमबार १५:१७
मोर सुन्दर झोपरी

पत्रपत्र छाँइल हेरटी सुहावन
गुड्गर, जुर, सिट्टर छाहीँ
बँन्डिया मनिक चुहल सीट
बुँदा कपारीम परलेसे चौकस लग्ना
खँरियक भिटा माटीले चब्डल
बाँसक बाटी प्रकृतिसे जुरल
चीज विशेषता फरक बा
मोर सुन्दर झोपरी


छोटी मनिक बाट पटा नै हो
मनो बास्तविक चीज कल्पना
करके कवाई लग्ठु
किसन्वँक घर कमैया कम्लरही
बुुक्रही, बुक्रा डाई बाबा
भिन्सारे एक मुर्गी बोल्टी किल
हर जुवा लेके खेट्वम टटा आँ आँह्
कहटी सजना गाइहस सुन्ठु
डाइहे रातभर टक्रयाङ्घ टक्रयाङ्घ ढेकी
कुटके सकारे खेट्वम कल्वा डेहे
जाइट डेख्ठु
आपन बुकरामे खैना नाइहोके
दिनभर मकैक् डरियामे चकियामे
घुर घुर पिसके साँझ साकर
खवैलक, सुटैलक सम्झठु उहे
मोर सुन्दर झोपरी


यिहे झोपरीम जरम लेनु
मोर डाई सुन्दर सन्सार डेखैली
न खाइक सुख न सुटक निन्द
रात दिन रो रोके कोँना बोँका
बोक बोक्के नेगेँ बोले सिखैलक
याद बनके जिवा डेहठ्
जार छेक सुटिक गटिया पारके
टुक टुक बुडिकसंग सुवर चह्राई जाके
छटिया, जाम, कोसम बहेर बिनेहस लागठ्
यिहे झोपरिम बेरी खाके, ढकियक पेँडिम
मट्टी टेलहा डिया ढारके
जुगुर जुगुर पह्रलक याड झल्झल्टी आइठ्
सम्झटी सम्झटी आँखिक पल्का
मनसे आँस टपटप चुहे पुुगठ्, कलम रुक्जाइठ्
एक्काइसौं सताब्दीमे खरक झोपरी
इतिहासके रुप लेसेकल बा
मोर सुन्दर झोपरी
कैलारी गापा–४, के गाउँ खल्ला टोल कैलाली

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