२० माघ २०७९, शुक्रबार February 3, 2023

साम ढारके गुजारा चलैटी दुतिराम

२२ मंसिर २०७९, बिहीबार
साम ढारके गुजारा चलैटी दुतिराम

सागर कुस्मी
हसुलिया। कौनो फेन सीप सिख्बो टे जिन्गी भर काम लागठ् । कहुँ फेन जाके काम कैके खाइ सेकजाइठ् । एकर एक उदाहरण हुइँट् दुतिराम चौधरी ।

कैलारी गाउँपालिका ३ ओमनगर शिविर (टिसियन भर्री) के दुतीराम चौधरी ४७ सालसे साम ढर्ना काम करटी आइल बटैं । इहे कामसे उहाँ आपन परिवार चलैटी आइल बटैं । बिहन्नी खाना खाके गाउँक गल्ली गल्ली छिरठैं कैंचीमे साम ढारे ।

चाहा जटरा घाम रहे, चाहा जटरा जार कब्बु सिहरा नैमानके, दुतिराम कबु इ गाउँ कबु उ गाउँ हरेक दिन हुँकार कैँची, डाउ, मुडार, चक्कु लगायत ढरियार हठियारमे साम ढारके अपन गुजारा चलैटी बटैं । साम ढारके अपन परिवारके सानबिहानके गास जुहैटी आइल बटैं ।

साम लगाइ अपन गाउँ ठाउँ किल नाही उहाँ कैलालीक् तराई फँटुवाके हरेक गाउँक गल्लीगल्ली छिरले बटैं । अटरै किल ठोरे टे बर्दियाके राजापुर, निमुवाँबोझी, गुवारी, लालीबजार, ओलानी बजार, पर्सेहनी, शान्तिबजार लगायत ठाउँमे अपन जानपहिचान बना सेक्ले बटैं ।

विगतहे सम्झटी उहाँ कहलै–‘जब मै ५ बरसके रहुँ टे मोर बाबा बिटगैल । घरेम कमुइयाँ कोइ नैरहे । घरेक जिम्मा मोर उप्पर आइल । मै छोट हुइलेक मारे कुछ करे सेक्ना अवस्था नैरहे । ओहेमारे बाहेर जाइ पर्ना बाध्य हुइलुँ ।’

गाउँक लर्कन संगे भारतमे काम सिखम ओ कमैम कहिके भारतओर गैल रहिट । वहाँ जाके उ ओहैंक एक्ठो नौवाँके डोकनमे लग्नै । छोट हुइलेक ओर्से कुछु काम करे नैजानिट् । एक दिन कैंचीमे साम ढारेबेर कैँची गिरा मरनैं । ओहेबेर सेंठुवा बरा घिनाहुनके गर्याइल आभिनसम सम्झठै ।

कुछबेर रहिके फेन उ सेंठुवा हुँकिन सम्झैटी कलिन, ’देख भैया एहि सीप तेरा भला करेगा, एहि कामसे तेरा जिन्दगी सुधरे गा ।’ इ बात दुतिरामके दिमागहे मन्के किल्कोरल । समयके डौरान संगे उहाँ हरेक चुनौती, दुख ओ संघर्षहे जुझ्टी गैनै । भारतमे १० बरस साम ढर्ना सीप सिख्के अपन घर लौट्नै ।

दुतिराम जब घर अइलैं टे परिवार पल्ना कौनो काम नैमिल्लिन । अक्षरके नाउँमे क टक ना पर्हल ना लिखल हुइलेक मारे मजा कामफें मिलि कहाँसे । उहाँक ठे आब कौनो उपाय नैरहिगैलिन । उपाय रहिन टे सिरिफ ओहे कैंचीमे साम ढर्ना किल ।

सँइकिल लेले गाउँ–गाउँ गल्ली–गल्ली नेंगे लग्नै । सुरुमे कैंचीमे किल साम ढारिंट । डु रुपियामे साम लगाके सोंचलहस पैंसा नैआइन । उहाँ ढिरेढिरे संघर्ष कर्टी गैनैं । उहाँ कठैं, ’पहिले डेहारी ३०० रुपिया कमाही होए ।’ टभुनफें उहाँ इ काममे तन मन लगाके सँइकिलमे डौरना नैछोरलैं ।

मने आब समय ढेर परिवर्तन होगैल बा । जुग जबाना बडलगैल बा । आब टे दुतिराम समय संगे नेंगना सफल हुइल बटैं । अब्बा दिनक डेहारी एक हजारसम कमाही हुइ लागल उहाँके कहाइ बा ।

आझ आके ओहे कैंचीमे साम ढारट ढारट दुतिरामके परिवारके भविस्य ओजरार हुइल बटिन । अपने अपन कमाही छुट्टे कमाइटैं कलेसे लर्कापर्का अपन अपन अपन कमाहीमे जिए सिखल बटैं ।

छाइछावन अपन अपन मेहनतमे जिएटैं कलेसे दुतिराम अपन पस्ना चुहाके जिनगी ढकेल्टी बटैं । अझ्कल महिनाके २५÷३० हजार इहे साम लगाके आम्दानी हुइटी रहल उहाँ बटैठैं । सक्कु लर्का जवान होके अपन अपन काममे लागल उहाँ बटैठैं ।

छोट लगानीमे फेन मजासे मेहनत कैलेसे जिनगी मजासे चलाइ सेक्जाइठ । उहाँके इ काम हेरके कहे सेक्जाइठ कि पैंसा कमाइक लाग अन्टे बाहेर देश जाइ पर्ना कौनो जरुरी नैहो । अपने गाउँघरमे फेन लगनशील होके पस्ना चुहैलेसे ढेर आम्दानी करे सेक्ना उहाँ जवान पुस्टनहे सल्लाह डेठैं ।

के हुइँट् दुतिराम चौधरी ?
दुतिराम चौधरी एक मुक्त कमैयाँ हुइँट् । कैलारी गाउँपालिका ३ ओमनगर शिविर कैलालीके बासी हुइँट् । हुँकार एक्ठो गोसिनियाँ, ४ ठो छाइ ओ एक्ठो छावा बटिन । दुतिराम चौधरी अपन ठाउँके मुक्त कमैयाँ समाजके क्षेत्रीय अध्यक्ष फेन हुइँट कलेसे पहिले हसुलिया ओ भजनी लगायतके नौ गाविसके अध्यक्ष होके समाजसेवा फेन कैले बटैं ।