सखियै हो, माघक् पिलि गुरी जाँर

-कैलारी अनलाइन

बुधवार, २९ पौष 5:00 AM

डा. कृष्णराज सर्वहारी
माघेसंक्रान्ति आम नेपालीके पर्व हो । ओम्नेफे पश्चिमा थारू समुदायसे मनैना खास पर्व हो । थारू समुदायसे माघीहे स्थान विशेषअनुसार माघ, खिचरा, खिचरी, तिला संक्राइतफे कहठे । थारू समुदायमे कोई यिहीहे नयाँ वर्षके रूपमेफे नामकरण करठै । खासमे माघी नयाँ आर्थिक वर्ष भर पक्कै हो । काहेकी गैल वर्षके व्यक्तिगत, सामूहिक हरहिसाबके फरफारक यिहे अवसरमे रहठ ।
उपस्थित ख्याल (भेला)से उही बरघरहे निरन्तरता डेना कि नयाँ चयन कैना म्यान्डेट डेहठ । कामकारबाहीके क्रममे बरघर कौनो गल्ती करले सचेतफे कराजाइठ । बरघरहे स्थान विशेषअनुसार ककनडार, भलमन्सा, महटाँवाफेकहठै । ओक्रे नेतृत्वमे गाउँ सञ्चालनके लाग मौखिक नियम तय करजाइठ । जैसिन सिँचाइके लाग झलारी (कामदार) के व्यवस्थापनसे चौपायासे बिगार करलेसे कटरा दण्ड जरिवाना लेनासमके नियम बनथ । ओस्टेक गाउँके रखवारीके लाग चौकीदार, गाउँके मरुवा (देउथान) मे पूजा कैना चिराकीसे हर फरह बनैना लोहारसम माघीमे चुनठै ।
गाउँ समुदायके केल नइहो, परिवारके गर्ढुरिया (घरमूली) के बन्ना कना छलफल, घरसल्लाहफे यिहे माघमे हुइठ । प्रायः बरका भाइ घरमूली रहठै । मने ओकर कामप्रति चित्त नइबुझलेसे और भैया अगुवाइ करठै । बाट नइमिल्लेसे छुट्टठै । भाइ भैया आघेपाछे झगडा करल डेख्लेसे अभिभावक कहठै, ‘काहे बेमौसममे झगडा करठो, बरु माघी आइलपाछे अलग हुइना ।’ माघीबाहेक आघे पाछे छुट्टल परिवारहे मजा नजरसे नइहेरजाइठ । यैसिक मघौटा नाचके माहोलमे अलग हुइना परिवारके माघी भर खल्लो रहठ ।
सहर पैठल माघी
२०५९ सालमे सरकार थारू समुदायके पर्व माघीमे विदा डेना निर्णय करलपाछे माघी थारू गाउँके घेरा पार करके सहर पैठल बा । आउर कुछ वर्षयहोर सात समुद्रपारि समेत माघी महोत्सवके रूपमे मनाई लागल बा । माघीके अवसरमे कैना मेला, महोत्सवमे थारू नृत्यके झंकारसंगे थारू परिकार मजे व्यापार कर लागल बा ।
सहर पैठल माघी बाहिरी झकिझकाउके आवरण टे पैले बा मने पर्वके मौलिकता भर गाउँमे छोरके आइल बा । काठमाडौं चिहुरसेकलपाछे यी पंक्तिकारके गाउँके माघी छुटल बा । बा टे केवल माघीके मीठ अग्र्यानिक सम्झना केल ।
गाउँके माघीसे संघरीया भैया ओ इष्टमित्रसंग भेटघाटमे जोरठ । काहेकी गाउँ जटराफे भारी काहे नहोए, माघ १ गते लहाइलपाछेक सकारे गाउँके प्रत्येक घरमे पैठटी नाटअनुसार सेवाढोग करजाइठ । माघीके सबसे भारी सौन्दर्य यिहे हो कि पानी बाराबार रहल छिमेकीके ठेन जाके बोलीवचन साटजाइठ । यी समुदायमे एकता, प्रगाढ सम्बन्ध, आपसी सहयोग सद्भाव आदानप्रदान कैना कार्यमे सहयोगी भूमिका खेलठ । टबमारे माघीहे मेलमिलापके दिनके रूपमेफे लेजाइठ । मने सहरकेन्द्रित महोत्सवमे स्टलमे राखल खैना चिज (खास करके डारु शिकार) ओ मञ्चमे प्रदर्शित नाचमे दर्शक मक्ख पररके बैठठै । ओर कहाँके भेटघाट नवीकरण हुइना ? टबमारे सहरके माघी कृत्रिम रहठ ।
माघीमे ढमार ओ ढुम्रु विशेष गीतके रूपमे गाजाइठ । मने यी गीत पुस्तान्तरण हुई नाइसेकल हो । मघौटा नाचमे साली भाटु (भिनाजु) बीचके प्रणय प्रसंगहे केल गायकहुक्रे ढेर प्राथमिकता डेटी रहल बाटै । टबमारे धमार गीतमे निहित समाजशास्त्रीय प्रसंग ओझेल परटी गैल बा ।
२०५७ सावन २ गते कमैया मुक्तिके घोषणा आघेसम कमैया, कम्लहरीहुक्रे माघीमे करिब एक अठुवार विशेष छुट्टी पाइट । ऋण नइरहल कमैया मालिक फेरिट । अथवा काम नइकैना स्वतन्त्र हुइट । यैसिक यिहीहे मुक्ति दिवसके रूपमेफे लेजाए ।
माघी लहान अर्थात् माघ १ गते सकारे स्थानीय जलाशयमे सामूहिक रूपमे लहाई जैना ओ जलदेउतासंग अपन दुःखसुख सुनैना करठै । लकासेक्के पीठा या चाउरके टीका लगैठै । यैसिक थारू समुदायमे उज्जर टीका लगैना चलन बा । मने सहरमे माघेसंक्रान्तिमे लहैना परम्परा हेराइल बा, उज्जर टीका धारण कैना टे दुरके बाट ।
लहाके घरेम आइलपाछे पाँच औंलाके छाप पर्ना करके ‘निस्राउ’ छुना चलन बा । निस्राउमे चाउर, मासके दाल ओ नोन रहठ । यम्ने थपथाप करके विवाहित चेलीबेटीहे उपहार पठाजाइठ । निस्राउके मौलिक चलन छोरके थारू समुदाय अब्बे भाइटीकामे लिप्टल बा ।
माघमे सुँवरक शिकार, अन्डीके जाँर ओ नम्मा ढिक्री यी तीन परिकार अनिवार्य रहठ । लेखक छविलाल कोपिलाके अनुसार माघपाछे समय नम्मा हुइल ओरसे नम्मा ढिक्री बनाइल तर्क बा थारू समुदायमे । दुसर तर्क माघमे नम्मा ढिक्री खाइलपाछे आयु नम्मा हुइना जनधारणा बा ।
आजके दिन छोट–छोट लर्काफे बहुट रमैठै । ओइने नयाँ लुगा पैठै । माघीके पहिल दिन नयाँ कपडा फेर्ना दिनके रूपमेफे लेजाइठ । वर्षभर पुराना लुगा लगैलेसेफे आजके दिन लुगा फेरे सेक्लेसे मजा हुइना पुर्खा बटैठै ।
माघीके दुसरा दिन ‘खिच्रहवा’ । यी दिन खिचडी खाके गाउँके भेला आयोजना करजाइठ । आजके दिन कोई कुहीप्रति पदीय विभेद करे नइपाजाइठ । अधियाँ खेती कैना किसान जमिनदारकहाँ ‘करै’ मे दारू लेके जैठै । वर्षभरके कामके समीक्षा करटी फेरसे जिम्मेवारी नवीकरण कैना यी छलफलहे माघी डिवानी कहठै । मने अधियाँ डेना बहानामे जमिनदारहुक्रे अब्बेफे अधेरुवाके छाई कमलरी मग्ना, बेठबेगारी करैना श्रमशोषण जारी बा ।
टिसरा दिन भुराखेल अर्थात् बृहत् बैठक करके गाउँके अगुवा चयन करजाइठ । बैठकमे गैल वर्षमे रहल करल डगरघाट, कुलानाला, सडक, धार्मिक पूजापाठलगायत विकासके कामसम्बन्धी समीक्षा हुइठ । वषौसे एक्के डेरामे बैठना सहरिया अपन टोलके सरसफाइ, विकासनिर्माणमे कौनो ध्यान नइडेठै । जब कि बरघरके अगुवाइमे करोडौंके विकासनिर्माण छपरगन्टी प्रणाली अर्थात् एक घरके एकजाने अनिवार्य श्रमदान करे पर्ना नियमसे आघे बह्रल बा । यी अपन गाउँ अपनही बनाई, सरकारके मुख टक्टी रहे नइपरल कना सन्देश डेहल बा । स्थानीय सरकार बरघरहुकनसंगके सहकार्यमे गाउँहे कायापलट करे सेक्ठ । मने जनप्रतिनिधिहुकनके नजरमे बरघर ओझेलमे बाटै ।
सहरके माघी मनोरञ्जन ओ खानपिनमे सीमित हुइल बा । लोकतान्त्रिक ढंगसे थारू समुदायमे अगुवा चुन्न, नीति–निर्माण बनैना, वर्षभरके समीक्षा कैना हुइल ओरसे यी पर्वहे आउर व्यवस्थित बनैना जरुरी डेखजाइठ । मने सहरमे यी बारे छलफल शून्य बराबर बा । यिहे पुस १८ के फेसबुक स्टाटसमे थरुहट नेता लक्ष्मण थारूके अभिव्यक्ति बा, ‘माघ पर्वमे खानपिन, टोलटोलमे नाचगान व्यापक तयारी मजे लागथ । टीकापुर घटनामे थारूहुक्रे जेलमे बाटै, संविधान हमार लाग नइबनल, आन्दोलन अधुरे बा ।
शासकहुक्रे यिहे चाहठै की थारूलगायत आदिवासी जनजातिहुक्रे अपन चाडबाडमे कुछ हजार चन्दा मागिट, अपने भेषभूषामे नाचिट गाइट । दुईचार पेग ढेर ताटिट । रमैटी रमैटी राजनीतिक एकता, अधिकार ओ न्यायके बाट करबे नकरिट । आशा करी, यी बारके माघ मनाईबेर आन्दोलनके छलफल करी । अधिकार, न्यायके बाट करी, माननीय रेशमलाल चौधरी ओ राजबन्दीहुकनके बाट करी ।’ लक्ष्मणके अभिव्यक्ति निश्चयफे मननीय बा । मने अब्बे सहरके माघी बहसहे तिलाञ्जलि डेके खोेक्रा माघीमे रमाइल बा ।
ओ, अन्तमे बर्दिया जोतपुरके सीताराम चौधरी विगत दुई दशकसे कीर्तिपुर बैठटी आइल बाटै । कीर्तिपुरके पाँगामे बरघर रेस्टुरेन्टसमेत सञ्चालन करल उहाँ सुरुसे कीर्तिपुर बसोबास कैना थारूहकनके सर्वसम्मत बरघर रहल बाटै । उहाँक अगुवाइमे कीर्तिपुर बैठना थारूहुक्रे एकजुट बाटै । कीर्तिपुरमे जस्टे बरघर प्रणाली सहरमेफे भिœयाई सेक्लेसे केल माघी सार्थकता पाई । नइहुइलेसे माघी उहे साली भाटु गीतके ठुम्का, सुरिक सिकार ओ गुरी गुरी जाँडमे केल सीमित हुइना खतरा बा ।
सभार : पहुरा थारु दैनिकसे (२०७६ पुस २९ गते प्रकाशित)

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