माघ टिहुवार थारु महिलाप्रतिके अपनत्व

-कैलारी अनलाइन

मङ्गलवार, २८ पौष 11:32 AM

उन्नती चौधरी
पाछेक अवस्थामे थारु समुदाय बीच ‘माघ’ वा ‘माघी’ पर्व कहिके फेसबुकमे बहस हुइटी बा । थारु गाउँ बस्तीमे माघके अवसर पारके टमान कार्यक्रम हुइटीरहल सुनजाइठ । फेसबुकके स्र्टासमे फेन डेखाइटी बा । मने टमानजे माघहे ‘माघी’ बनैटी बटै । ‘माघ महोत्सव’के ठाउँमे ‘माघी महोत्सव’, ‘माघ मिलन’के ठाउँमे ‘माघी मिलन’ कार्यक्रम आदि । काहे कि बोली चालीके भाषामे ‘माघ’ शब्द मिठास नैहुइल काहुन । कैसिन विदम्बना । हम्रे हमार पुर्खासे अजल शब्दहे मिठास नूहुइल कहिके हत्या करठी ।
हमार पुर्खाहुक्रे माघमे स्नान कैके अपनसे भारीहे ढोग ओ छोटहे आशिर्वाद डेना चलन बा । पहिलेक हमार पुर्खाहुक्रे कहकुट बनैलैरहिट, “गंगा लहाए सब कुछ पाए, कुँवा लहाए थोरथार पाए, नल्का लहाए कुछ ना पाए” । यी उखान माघसे थारुहुकमनके ईतिहासहे हालसमफे जोगैटी रहल बा । मने महीहे डर का मानेमे लागठ की, कहु कटै यी इतिहासहे फे मेटाडिही कि÷मजा प्रयास, अब्बेफे यूवाहुक्रे सामुहिकरुपमे लडियामे लहाई जैठै । लडियक छेउँमे आगगी तप्ना व्यवस्था अघिल्का दिन तयार पारसेकल रहठ । जिहीसे माघ पर्वसे डेना सन्देश भिटर हमार पहिचान नुकल अभास हुइठ ।
माघके अपने विशेषता बा । माघ अइना आघे बजारसे गाउँसम माघके गीत गुन्जठ । हमार पुर्खा माघ शब्द लोप नहाए कहिके ‘धमार’ रचल रहिट ।
माघ लहइली सुरिक सिकार खैली रे हाँ…। सखिय हो माघक पिबि गुरी गुरी जाँर…।।
यी धमारसेफे व्याख्य करटी रहल बा । कि थारु समुदायसे मनैना पर्व माघी नइहो माघ हो ।
माघ पर्व, विदेशल थारु यूवाहुकनहेफे जन्मभूमिओर टन्ना शक्ति बा । पछिल्का कुछ वर्ष यहोर विदेशल यूवा भर गाउँ आई नाइसेक्लेसेफे विदेशमे माघ महोत्सव मनैटी रहल सुनजाइठ । उहाँहुक्रे फेसबुक टुयूटर मार्फत सम्झनाके तरेली पस्की रहल बाटै । उहाँहुक्रे ह्रदयसे माघ पर्व मनैलेसेफे, माघ पर्व लिखके थारु शब्दउप्पर प्रहार हुइटी रहल डेख्के थारु बुद्धिजिवी गोलबद्ध हुके बहस कैना
आवश्यक बा । हुइट ने गैरथारु थारु शब्द उचारण करे नाइजाके शब्द कस्मेटिक हुइटी रहल बा । जौनकारण हमार पुर्खासे आर्जल ढेर शब्दके हत्या समेत हुसेकल । आब भर हमार थारु यूवाहुक्रे पुर्खासे आर्जल सम्पत्ति अपने सम्पत्ति ठानके जोगैना जरुरी बा ।
माघमे थारु महिलाके मुस्कान
माघ पर्वमे सबसे ढेर थारु महिला खुशी हुइठै । पुस महिना लग्टीकी थारु समुदायके घर रगंना, भोज हुइल चेलीहुकनके ओठमे एकाएक मुस्कान छैना करठ । वर्ष भर गोसियक घरेम विताइल टिता मिठापल लैहर जाके संघरीयहुकनसंग भलाकुसारी कैना अवसरहे सम्झेबेर जे कुहीहेफे खुशी टे लागठ । उ पल थारु समुदायके लउण्डीहुकनके अनुहारमेफे प्रस्त हेरे मिलठ । ओइने पुस मसान्तके आगमनमे रमैटी लैहार जाई लग्ठै ।
पुस मसान्तके दिन लैहर आइल चेलीसंगे गाउँमे रहल चेली, बुहारी सक्कु भलाकुसारी करटी लग्गेक कुलुवा, लडिया, टलुवामे रमैटी मच्छरी मारे जैठै । मच्छरी मरना टे एक ठो बाहना रहठ । उ जमघटमे महिनौ दिनसम मनमे गुम्सल बाट संघरीया संगीहुकनसंग सातसाट कैना करठै । हास्टी, खेल्टी रमाईलो करटी मच्छरी मरठै ओ साँझके सक्कु जे आ अपन घरओर लग्ठै ।
घर आके सक्कु जानेक घर–घरमे बंगुर, सुवरके शिकार पाकल रहठ । सक्कुहुनके घरेम चाउरके डारु, जारके झोल तयारी अवस्थामे रहठ । कोई कोइ टे अन्दीके चाउरके डारु बनैना करठै । गाउँ भरिक मनै एक दुसरके घरेम पालिका पाला करके तयारी अवस्थामे रहल खैना करठै ओ रहरङी करठै । माघ महिना थारु समुदायके लाग विशेष महिना हो । आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक हिसाबसे यी महिना और महिनाकेसे ढेर महŒवपूर्ण बा ।
माघ १ गतेहे सक्कु नेपाली समुदाय माघे–संक्रान्तिके रूपमे मनैना करठै । थारु समुदायके लाग टे माघ पूरे महिना विशेष रहठ । टबमारे माघ पर्वहे थारुसे नयाँ वर्षके रूपमे मनैठै । माघ १ गते थारु परिवारके सक्कु सदस्य लडिया, खोला, तलाउ, कुवा वा पायक पर्ना जलाशयमे जाके अनिवार्यरूपमे स्नान कैना करठै । यैसिक लहैना प्रचलनहे थारुमे ‘माघ लहान’ कना कहठै ।
माघ लहानहे विशेष बनैना थारुहुक्रे पुसके अन्तिम दिन रातभर जाग्राम बैठना करठै जौन बेला थारु महिलाके भारी भूमिका रहठ । पुरुष रात भर डफ लेके, धमार ओ डम्फु बजाके गीत गैना करठै कलेसे महिला खानपिनके परिकार जस्टेः ढिक्री, खेरिया, अन्दीके भात, तरुल, गैजी पकाके जाग्रम बैठुइयाहे साथ डेटी डारु बनैना कामफे करठै । उ दिन पुरुष केल नाही महिलाफे खुलके रहरङी कैना करठै । जब मुरगा बोल्ठै ओ घरेक सदस्य सामूहिकरूपसे लहैना जलाशयओर गीत जैठी प्रस्थान करठै ।
वर्षमे एक चो जलदेवतासंग पानी किन्ठै
जलाशयओर जैना आघे घरमूली स्नान करे जैना सक्कु सदस्यहे पैसाके सिक्का बाँटना प्रचलन बा । पानीमे डुबुल्की मरना आघे जलदेवताहे उ सिक्का चढके केल स्नान करठै । वर्षमे एकदिन पानी खरिद करके स्नान करेक लाग जलदेवता खुशी हुइना ओ मागल फल प्राप्त हुइना विश्वास बा ।
निसराउ“ डेना चलन कायमे
माघमे थारुहुक्रे गच्छेअनुसारके दान करठै । शुद्ध जलाशयमे स्नान करलपाछे घरेम उत्पादित अन्न, चामल, दाल, बजारसे खरिद करल नोन, नगद, जिन्सी तथा लत्ताकपडाके सामान भोज करके गैल चेलीबेटीहे प्रदान करजाइठ । यैसिक छुट्याइल दानरूपी उपहार सामग्रीहे थारुमे ‘निसराउ’ कहठै । माघ पर्वमे लैहार बोलाइल भोज हुइल चेलीबेटीहे उहे निसराउ उपहारके रूपमे डेके घर पठैना प्रचलन बा । उपहारके लाग छुट्याइल निसराउ चेलीबेटीहे अनिवार्यरूपसे डेहे परठ । दान नइडेके घरमे प्रयोग करके उ अशुभ हुइना करठै ।
लोकतान्त्रिक प्रक्रियासे नेतृत्व चयन
थारु समुदायसे परापूर्वकालसे लोकतान्त्रिक प्रक्रियाके अंगीकार करटी आइल बा । घरके नेतृत्वकर्ता घरमुली रहठ । गाउँके नेतृत्वकर्ता बरघर रहठै । गाउँभरके सूचना प्रवाहकर्ताहे चिरक्या कहठै । हुलाकीके काम कैना चौकीदार रहठै । घरदेवता चलैना घरगुरुवा रहठंै । गाउँभरके देवता हेर्ना केसौका, बर्का गुरुवा रहठ । ढेर गाउँके देवता हेर्ना देशबन्ध्या रहठै । फलामके काम कैना, कपडा सिलाई कैना सक्कुहुनके जिम्मेवारी तोकजाइठ । पाइल जिम्मेवारीअनुसार सक्कु जे भूमिका निर्वाह करे परठ । जिम्मेवारी करलअनुसारके सक्कुहनके वार्षिक पारिश्रमिक तोकल रहठ । कुछ नगदमे लेठै टे कुछ अन्न लेना करठै । उ नेतृत्व चयनमे महिलाहुकनके पूर्ण सहभागिता हुइना करठ । पछिल्का चराणमे महिलाहुक्रेफे बरघर, भलमन्सा जैसिन नेतृत्व समहरटी आइल बाटै ।
उप्पर उल्लेखित यी सक्कु पदके लाग सामूहिक निर्णय अनिवार्य रहठ । सेकटसम व्यक्तिके सक्रियता ओ परिपक्वता हेरके सर्बसम्मत उम्मेदवार छन्ठै । उ सम्भव नइहुइलेसे लोकतान्त्रिक प्रक्रियाअनुसार मतदान कैना वा गोलाप्रथासेफे टुङ्यइना प्रचलन बा । जिम्मेवारी डेके महिला ओ पुरुषहे बरावरी मूल्याङकन करजाइठ । महिलाफे घरके होए या गाउँके, जिम्मेवारी लेना तयार हुइठै । ओ कौना ठाउँमे चुनाव जिटकेफे जिम्मेवारी समहरटी आइल बाटै ।
कौनो घरके घरमुली महिला रठै, कौनो घरके पुरुष । कौनो गाउँके बरघर महिला रठै कलेसे कौनो गाउँके पुरुष । कौनो गाउँके बरघर गैरथारु रहल फेन उदाहरण बा । गाउँके भेला ओ सामुहिक छलफलसे जा निर्णय करठ, ओहे सबहे मान्य हुइठ । और बेला बोले नैसेक्ना महिलाहुक्रे माघमे निर्धक्क होके बोले
सेक्ठै । गाउँके हरेक काम कारवाहीके समीक्षा फेन हुइठ ।
माघके नैमजा पक्ष ‘विगतके भल्को’
माघ थारु महिलामे खुशी किल नैनानठ दुःखके क्षण अनगन्ती बा । कमलहरी प्रथा कायम रहलबेला छाई मालिकके घरसे छुट्कारा डेना वा मालिकके घर पठैना निर्णय माघ महिनामे करजाए । वर्ष भर मालिकके घरमे बैठल चेलीहुकनके ओठमे फेन मुस्कान छाए । काहेकि उ माघ मनाइ अपन घर आइ पाइट । मने कोइ भर करिया बद्री आइल जस्टे अन्धार मुहार लेके माघ मनैना बाध्य फेन हुइट । काहेकि माघ १ गते पाछे कमैया बैठलहुक्रे मालिकके घर छोरना, कोइ कमैया बैठे परना, नयाँ मालिकके घर जोइ परना, औसटेक कमलहरीहुकनके हकमे फेन ओहे होए ।
भाग्यबस अब्बे सरकार कमैया कमलहरी प्रथा अन्त्य करले बा । तत्कालीन सरकार कमलहरीहे मुक्त घोषणा करल पश्चात फेन २०७२ सालके तथ्यांकमे भर १३ हजार १ सय ५६ कमलहरी मध्ये ४ सय २४ जाने कमलहरीहे मुक्त करना बाँकी रहल डेखाइठ । कमलहरी प्रथासे माघ आइल लगत्ते थारु महिलाके मन झस्यांग बना डेहठ । मलिकके घरमे कमलहरी बैठल अवस्थामे साविक चौमाला–८, डैड्वारी मुक्त कमैया वस्तीके मुघी चौधरीके काठमाडौंमे मालिकके घरमे मटीतेल अख्न्याके हत्या करगिल रहे । ओस्टेक धनगढी कैलाली घर रहल उर्मिला राना धनगढीस्थित प्रकाश बिष्टके घरमे कमलहरी बैठल अवस्थामे झुन्डाके हत्या करल रहे, कलेसे दाङ लालमटीया घर रहल सृजना चौधरीके काठमाडौं ललितपुरके चाकुपाटमे इञ्जिनियर युवराज पौडेलके घरमे मटीतेल डारके हत्या हुइल रहे । यी ईतिहास थारु महिलाहुकनके लाग माघसंग घनिष्ट सम्बन्ध जोरल बा ।
पाछेक चरणके राजनीतिक अवस्थामे थारु महिलाहुक्रे अपन ईतिहासहे सम्झटी फेरफेन कोइ केक्रो दास नाबने । चाहे उ आर्थिक क्षेत्र रहे या राजनीतिक क्षेत्र । माघ महिना महिलाहुकनहे भाइचारके सम्बन्धमे डेना खुशी एकडम कायम रहे । थारु महिलाहुक्रे फेन माघ महिनामे अपन सृजनात्मक शक्तिहे प्रस्फुटन करना वातावरण सहज होए कना सबमे शुभकामना बा ।
सभार : पहुरा थारु दैनिकसे (२०७६ पुस २९ गते प्रकाशित)

थप सम्बन्धित समाचार
Follow
Us